अर्थशास्त्री से ‘चाय वाला’ बेहतर: अमित शाह

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नई दिल्ली । मुद्रा रध करने से सभी राजनीतिक दलों के रणनीति को बदल कर रख दिया है क्यूंकि काला धन अब चुनाव में इस्तेमाल नहीं हो पाएगा। राष्ट्रपति भाजपा अमित शाह ने यह बात कही और उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जात पात की राजनीति पर नहीं बल्कि प्रदर्शन के आधार पर मुकाबला होगा। अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी आलोचना की जिन्होंने मुद्रा रध की आलोचना की थी। अमित शाह ने कहा कि एक अर्थशास्त्री होने के बावजूद उन्होंने विकास दर को 8 प्रतिशत से 4 प्रतिशत तक पहुंचाया था जबकि एक “चाय वाला” प्रधानमंत्री ने फिर इसे 7.6 प्रतिशत तक पहुंचाया है। अमित शाह ने “एजेंडा आज तक” कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जनता केंद्र नोट रध करने के इकदाम का समर्थन कर रहे हैं और इस वजह से काला धन को जो धक्का पहुंचा उसने स्थिति को बदल कर रख दिया है। इस कालाधन चुनाव में इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने कहा कि अगर इस मुद्दे खड़े हो रहे हैं सभी राजनीतिक दलों के लिए समस्या होंगे। यहाँ सभी के लिए एक ही मैदान है। हम चाहते हैं कि काला धन इस प्रणाली से पूरी तरह हटा दिया जाए।
बसपा प्रमुख मायावती की ओर से नोट रध को ‘वित्तीय आपातकाल’ ‘करार दिए जाने के सवाल पर अमित शाह ने कहा कि निश्चित रूप से उनकी पार्टी के हक़ में ऐसा ही हुआ है। उन्होंने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दलों की आलोचना करते हुए कहा कि 8 नवंबर तक वह हमसे पूछ रहे थे कि काला धन के संबंध में सरकार ने क्या कदम उठाए और अब यही पार्टियां कह रही हैं कि काला धन के खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्युं की गई? उन्होंने दावा किया कि मुद्रा रध करने के बाद काला धन का अस्तित्व संभव नहीं है, क्युंकि अगर उसे घर में रखा भी जाए तो यह केवल कबाड़ होगी और अगर यह बैंकों में लाया जाए तो निश्चित प्रणाली का एक हिस्सा बन जाएगा, जिस पर टैक्स भी लगाया होगा। उन्होंने मनमोहन सिंह के बारे में कहा कि उन्हें देखने के बाद वे (अमित शाह) कभी अर्थशास्त्री बनना नहीं चाहेंगे। मनमोहन सिंह को आलोचना के बजाये इस स्थिति में परिभाषित करनी चाहिए थी।
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