चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोका, भारत पर दबाव बनाने की कोशिश

बीजिंग/नई दिल्ली. चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोक दिया है। चीन यहां बेहद खर्चीला एक हाइड्रो प्रोजेक्ट चला रहा है और इसके तहत एक बांध बनाने की कोशिश में जुटा है। चीन के इस कदम से भारत समेत कई देशों में ब्रह्मपुत्र के पानी का बहाव प्रभावित हो सकता है।चीन ने क्यों किया ऐसा…
– चीन की शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने शनिवार को अपनी एक रिपोर्ट में प्रोजेक्ट के एडमिनिस्ट्रेशन ब्यूरो के हेड झांग युनबाओ के हवाले से यह दावा किया।
– तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी को यारलुंग जांगबू कहा जाता है। चीन ने इसकी सहायक नदी शियाबुकु का पानी रोका है।
– यहां लालहो नाम से एक प्रोजेक्ट चल रहा है, जिस पर चीन अब तक 740 मिलियन डॉलर (4.95 बिलियन युआन) का इन्वेस्टमेंट कर चुका है।
– बता दें कि भारत-चीन के बीच कोई वाटर ट्रीटी नहीं है। हालांकि दोनों देशों ने बॉर्डर के दोनों ओर बहने वाली नदियों को लेकर एक एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म (ELM) बना रखा है।
– अक्टूबर 2013 में दोनों देशों की सरकारों ने नदियों पर कोऑपरेशन को मजबूती देने के लिए एक एमओयू पर साइन भी किए थे।
चीन-पाकिस्तान की मिलीभगत !
– भारत उड़ी आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान पर दबाव बना रहा है।
– इसी सिलसिले में पीएम नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सिंधु जल समझौते का रिव्यू किया था।
– इसके बाद पाकिस्तान ने धमकी दी थी कि वह चीन से कहकर ब्रह्मपुत्र का पानी रुकवा देगा।
– अब चीन के इस कदम को भारत के दबाव का जवाब माना जा रहा है।
– हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि चीन की तरफ से ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी का पानी रोके जाने से भारत-बांग्लादेश पर इसका क्या असर पड़ेगा।
तिब्बत के जाइगेज में चल रहा है प्रोजेक्ट
– चीन का यह प्रोजेक्ट तिब्बत के जाइगेज में चल रहा है।
– इस इलाके को शिगेट्स भी कहा जाता है। यह सिक्किम के पास है।
– जाइगेज से होते हुए ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल प्रदेश में दाखिल होती है।
– शिन्हुआ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह प्रोजेक्ट जून 2014 में शुरू हुआ था। इसे 2019 तक पूरा किया जाना है।
1 नदी, 3 नाम
– यारलुंग त्संगपो नदी तिब्बत से निकलती है।
– यह कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील से साउथ-वेस्ट में स्थित तमलुंग त्सो (झील) से निकलती है।
– तिब्बत से होते हुए यह भारत के अरुणाचल प्रदेश में चली जाती है। यहां इसे इसेसियांग नदी के नाम से जाना जाता है।
– यही नदी आगे चलकर और चौड़ी हो जाती है और तब इसका नाम ब्रह्मपुत्र हो जाता है।

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